शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

दिल हृदय HEART

 आइए आज हम अपने दिल को समझते है ------

दिल ( HEART) 


मानव दिल 

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दिल जिसे हम ह्रदय या heart भी कहते है । ये एक बहुत ही अच्छा महत्वपूर्ण और जरूरी मानव अंग हैं ।


HEART ( दिल ) -----  




हमारा heart एक अत्यंत जरूरी अंग है जो हमारे शरीर में blood circulation का काम करता हैं ।

यह हमारे शरीर में छाती के मध्य , फेफड़ों के बीचों बीच थोड़ा बाई ओर स्थित होता है ।

यह एक मस्कुलर अंग हैं जिसमें हड्डियां नहीं होती है। यह पूरे जीवन धड़कता रहता हैं अर्थात blood circulate करते रहता हैं । 

इसका आकार हमारे हाथों की बंद मुट्ठी की तरह होता हैं ।


STRUCTURE OF HEART  (  मानव दिल की संरचना ) -----

हमारे शरीर में दिल बंद मुट्ठी की तरह होता हैं , जिसका वजन 250 से 350 ग्राम तक एक वयस्क मनुष्य  में होता है । इसके चारों तरफ दोहरी परत वाली झिल्ली होती है जिसमें तरल पदार्थ भरा होता हैं और यह हमारे heart को सुरक्षा देता हैं।

CHAMBER ------



इसमें 4 चैंबर होते है ।

 2 ऊपर और 2 नीचे  । ऊपर के चैंबर को ATRIUM और नीचे के चैंबर को ventricle कहते है ।

ऊपर के दोनों चैंबर को क्रमशः right Atrium और Left atrium तथा नीचे के चैंबर को क्रमशः right ventricle और left ventricle कहते है ।

Right और Left पार्ट एक दीवार से अलग होता है जिसे septum कहते हैं । 

यह दीवार  ऑक्सीजन युक्त blood ( oxygeneted blood) और बिना ऑक्सीजन युक्त blood ( deoxygenated blood ) को मिलने से रोकता है ।

LAYER 

इसमें तीन  लेयर भी होता हैं 

1) PERICARDIUM --- यह सबसे बाहरी परत है, जो इसको सुरक्षा प्रदान करती है ।

2 ) MYOCARDIUM ---- यह मध्य की मोटी मस्कुलर परत है जो इसको मजबूती देता हैं।

3 )  ENDOCARDIUM ---- यह भीतरी परत है ।

VALVES ---- 

Blood को एक निश्चित दिशा में प्रवाहित करने के लिए हमारे heart में चार प्रकार के valves होते है ।

1 ) TRICUSPID VALVES ----  यह Right Atrium और Right ventricle के बीच होता है ।

2 ) BICUSPID VALVES ---- इसे Mitral वाल्व कहते है ।यह लेफ्ट Atrium और Left ventricle के बीच होता है ।

3)  PULMONARY VALVES ---  यह Right ventricle और आर्टरी ( धमनी )  के बीच होता है ।

4) AORTIC VALVES ----  यह लेफ्ट ventricle और Aorta  ( महाधमनी ) के बीच होता है ।

NOTE ---- ये वाल्व BLOOD को एक ही दिशा में प्रवाहित होने देते है तथा RETURN आने से रोकते है ।

HEART BEAT ---- 

एक स्वस्थ व्यक्ति का दिल प्रति मिनट 72 बार धड़कता है , औसतन 60 से 100 के बीच ये हार्ट बीट हो सकता है। हृहृदय की धड़कन एक विद्युत आवेग ( electrical impulse) द्वारा नियंत्रित होती है जिसे सिनोट्रियल नोड कहते है । इसे प्राकृतिक पेसमेकर भी कहा जाता है ।

HEART BEAT को हम दो चरणों में समझ सकते है 

1) SYSTOLE  ---- 

हार्ट बीट का ये एक ऐसा स्टेज है जिसमें हृदय की मांसपेशियां संकुचित होती हैं और blood को बाहर की ओर पंप करती हैं। जिसे systole कहते है । इसे ऐसे समझते है ।

जब हृदय का निचला पार्ट ventricle संकुचित होता हैं तब शुद्ध blood  ( oxygenated blood  ) निलय   ( ventricle ) से महाधमनी  ( aorta ) में जाता है तथा अशुद्ध blood दाएं निलय  (right ventricle) से फेफड़ों की धमनी ( pulmonary  artery ) में जाता हैं ।  

इसका काम blood को फेफड़ों और शरीर के अन्य हिस्सों में भेजना होता हैं ।

इसका measure 120 normal होता है ।

2 ) DIASTOLE ---- 

यह एक ऐसा स्टेज है जिसमें हृदय की मांसपेशियां relax होती है और ह्रदय blood को भरने के लिए तैयार होता हैं।  

इस समय दाएं आलिंद ( Right Atrium) से  शरीर से अशुद्ध blood ( deoxygenated blood ) आता है । तथा बाएं अलिंद ( left  artium ) में फेफड़ों से  शुद्ध blood (oxygenated blood ) आता है ।

इसका उद्देश्य हृदय को फिर से blood से भर देना है ताकि अगली प्रक्रिया में अर्थात systole द्वारा blood को पंप किया जा सके ।

इसका normal measure 80 होता है ।

इसी कारण systole और diastole की प्रक्रिया मिलकर एक स्वस्थ व्यक्ति में सामान्य रक्त दाब  ( blood presure ) 120 / 80 होता हैं ।

🔁 इसे सरल भाषा में समझे .....

सिस्टोल -- हृदय सिकुड़ता है (contract करता है) रक्त को बाहर भेजता है

डाइस्टोल --- हृदय फैलता है (relax करता है) रक्त को अंदर भरता है 

हृदय की विद्युतीय प्रणाली (Electrical System):---- 

हृदय की धड़कन एक विद्युतीय प्रणाली द्वारा नियंत्रित होती है:

1) साइनोएट्रियल नोड (SA Node): 

हृदय की धड़कन का प्राकृतिक पेसमेकर, जो विद्युतीय संकेत शुरू करता है।

2 ) एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड (AV Node): 

संकेतों को अलिंद से निलय तक पहुंचाता है।

3 ) पर्किन्जे फाइबर्स: 

निलय में विद्युतीय संकेतों को फैलाते हैं, जिससे संकुचन होता  हैं ।


🫀 मानव हृदय का कार्य (Function of Heart ) --- 

मानव हृदय (Human Heart) का मुख्य कार्य रक्त को शरीर के प्रत्येक भाग तक पंप करना है ताकि हर कोशिका को ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिल सकें तथा अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकाले जा सकें।

🌟 हृदय के मुख्य कार्य:

1. रक्त परिसंचरण (Blood Circulation)---- 

हृदय लगातार सिकुड़ता (contract) और फैलता (relax) है, जिससे यह रक्त को पूरे शरीर में और फेफड़ों में पंप करता है।

2. ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त को अलग रखना---- 

बायां हिस्सा (Left Side) – शरीर में ऑक्सीजन युक्त (शुद्ध) रक्त भेजता है

दायां हिस्सा (Right Side) – शरीर से आए अशुद्ध रक्त को फेफड़ों में भेजता है

3. फेफड़ों तक रक्त भेजना (Pulmonary Circulation)---- 

दाएं निलय से रक्त फेफड़ों में भेजा जाता है, जहां वह ऑक्सीजन से भरकर बाएं अलिंद में लौटता है।

4. शरीर के अंगों तक रक्त पहुंचाना (Systemic Circulation)---- 

बाएं निलय से शुद्ध रक्त महाधमनी (Aorta) के माध्यम से पूरे शरीर में भेजा जाता है।

5. हार्मोन और पोषक तत्वों का वितरण---- 

हृदय रक्त के साथ हार्मोन, ग्लूकोज़, पोषक तत्व और एंजाइम को पूरे शरीर में पहुंचाता है।

6. अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालना ---- 

रक्त में मौजूद अपशिष्ट पदार्थ (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड) को शरीर से बाहर निकालने के लिए फेफड़ों, गुर्दों और त्वचा तक पहुंचाया जाता है।

HEART DISEASE ---- 

हृदय से संबंधित बीमारियां ---- 


हृदय रोग (Heart Disease) या दिल की बीमारी वह स्थिति है जिसमें हृदय या रक्त वाहिकाओं से संबंधित समस्याएँ आती हैं। इसे मेडिकल भाषा में कार्डियोवास्कुलर डिजीज (Cardiovascular Disease) भी कहा जाता है ।

हृदय रोग के मुख्य प्रकार:

  • 1 ) कोरोनरी धमनी रोग (Coronary Artery Disease):

  •  हृदय की रक्त वाहिकाओं में वसा या कोलेस्ट्रॉल जमा होने से रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे दिल का दौरा (हार्ट अटैक) या एनजाइना (सीने में दर्द) हो सकता है

  • 2 ) अतालता (Arrhythmia): 

  • दिल की धड़कन में अनियमितता आना, जैसे बहुत तेज़ या धीमी धड़कन

  • 3 ) हृदय वाल्व रोग (Heart Valve Disease): 

  • हृदय के वाल्व में खराबी या संकुचन

  • 4 ) कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy): 

  • दिल की मांसपेशियों में कमजोरी या कठोरता

  • 5 ) हृदय विफलता (Heart Failure): 

  • दिल का रक्त पंप करने में असमर्थ होना

  • 6 ) जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease): 

  • जन्म से मौजूद हृदय की संरचनात्मक खराबी

  • 7 ) पेरिकार्डाइटिस (Pericarditis): 

  • हृदय के चारों ओर झिल्ली में सूजन

मुख्य लक्षण:

  • 1) सीने में दर्द या भारीपन

  • 2) सांस लेने में तकलीफ

  • 3) थकान, चक्कर आना

  • 4) तेज़ या अनियमित धड़कन

  • 5) पैर या पेट में सूजन

  • 6) पसीना आना, मतली, उल्टी  

  • 7) पीठ, जबड़े, गर्दन या बांह में दर्द फैलना 

मुख्य कारण:

  • 1) धूम्रपान, अधिक शराब सेवन

  • 2) उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल

  • 3) मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता

  • 4) डायबिटीज़

  • 5) अनुवांशिकता (परिवार में हृदय रोग का इतिहास)


Heart को स्वस्थ रखने के उपाय 

1. रोज़ाना व्यायाम करें (30 मिनट तेज चलना)

2. धूम्रपान और शराब से बचें

3. तनाव को कम करें (योग/ध्यान से)

4. संतुलित और कम वसा वाला भोजन लें

5. नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं

6. पर्याप्त नींद लें (6-8 घंटे)

रोचक तथ्य 

हृदय एक दिन में लगभग 1,00,000 बार धड़कता है।

यह प्रतिदिन 2,000 गैलन (लगभग 7,500 लीटर) रक्त पंप करता है।

हृदय का आकार और कार्य गर्भावस्था, व्यायाम और उम्र के साथ बदल सकता है।

NOTE  

यदि आपको इसके बारे में और जानकारी चाहिए या परिणामों को समझने में मदद चाहिए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

यह जानकारी केवल आपकी ज्ञान को बढ़ाने और अपने शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए है ।किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें l 


आपका 
अनिल कुमार  गुप्ता 


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दिल हृदय HEART

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