रविवार, 29 जून 2025

गाना कांटा लगा शेफाली जरीवाल कार्डियक अरेस्ट

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शेफाली जरीवाल 

कांटा लगा गाना से मशहूर शेफाली जरीवाल को कार्डियक अरेस्ट से मौत 

क्या है कार्डियक अरेस्ट........ कार्डियक अरेस्ट क्या है ये जान ने से पहले थोड़ा सा जानकारी शेफाली जरीवाल के बारे मे जानते है ।

शैफाली जरीवाल ---- 

शेफाली जरीवाल 


शेफाली जरीवाल का जन्म 15 दिसंबर 1982 को अहमदाबाद में हुआ  था । इनके पिता का नाम सतीश जरीवाल और माता का नाम  सुनीता जरीवाल है ।


इनके पहले पति का नाम हरमीत सिंह था तथा दूसरे पति पराग त्यागी है ।

शेफाली जरीवाल के पहले पति हरमीत सिंह 

शेफाली जरीवाल का दूसरा पति पराग त्यागी 

शेफाली सूचना प्रौद्योगिकी / कंप्यूटर एप्लिकेशन में मास्टर डिग्री थी ।

इन्हें 2002 में कांटा लगा म्यूजिक वीडियो से सफलता मिली तभी से इन्हें कांटा लगा गर्ल के नाम से जाना जाने लगा ।

2004 में ये फिल्म मुझसे शादी करोगी में नजर आई ।

इसके अलावे इन्होंने T.V शो नच बलिए ,  बूगी वूगी  , बिग बॉस 13 में भी काम किया ।

इसके अलावे इन्होंने बेब सीरीज baby come naa , तथा boo sabki phategi में भी काम किया ।

जब ये 15 साल की थी तब से ही ये मिर्गी ( एपिलेप्सी ) की बीमारी से पीड़ित थी परंतु वर्तमान में ये स्वस्थ थी ।

मृत्यु --- 

शेफाली जरीवाल की मृत्यु 27 जून 2025 को रात्रि 10 बजे कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई।

उन्हें बेलेव्यू मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

उनका पोस्टमार्टम कूपर हॉस्पिटल में किया गया ।

उनका अंतिम संस्कार 28 जून 2025 को ओशिवारा शमशान घाट पर हुआ।

अब समझते हैं कि कार्डियक अरेस्ट क्या हैं ?

कार्डियक अरेस्ट ---- 



यह एक गंभीर मेडिकल स्थिति है जिसमें हमारा heart ( हृदय / दिल ) अचानक blood को पंप करना बंद कर देता है  अर्थात दिल धड़कना बंद हो जाता हैं  जिस कारण हमारे शरीर में brain तथा अन्य अंगों तक ऑक्सीजन युक्त blood पहुंचाना बंद हो जाता हैं  , और तुरन्त मृत्यु हो जाती हैं । 

ऐसा तभी होता है जब हृदय / दिल की विद्युत प्रणाली में कोई खराबी हो । 

HEART ATTACK 

यह हार्ट अटैक से अलग होता हैं , हार्ट अटैक में blood circulation रुक जाता हैं जबकि कार्डियक अरेस्ट में blood की pumping रुक जाती हैं। स

SYMPOTMS ---- 

1) सांस लेने में प्रॉब्लम होना ,

2)  बेहोश हो जाना  , 

3 ) नब्ज का रुक जाना 

CAUSE  -----

1)  हार्ट अटैक 

2) पानी में डूबना 

3)  गंभीर चोट लगना 

4) हार्ट डिजीज 

5 ) इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन 


TREATMENT  ----- 


CPR देने का तरीका जिसे प्रत्येक व्यक्ति को आना चाहिए।

1) तुरंत CPR शुरू करना 

2 ) हॉस्पिटल तुरंत ले जाना 

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर 


कार्डियक अरेस्ट                         हार्ट अटैक 

1) यह एक आपातकालीन     1) यह भी एक गंभीर स्थिति है ।                              स्थिति है पर हर बार                                                  इमरजेंसी नहीं होती ।

2 )  इसमें दिल धड़कना बंद     2 ) इसमें खून का प्रवाह 

      हो जाता है ।                        रुक जाता हैं।

3 ) यह अचानक होता हैं ।       3 ) इसके लक्षण धीरे                                                   धीरे समझ में आते है ।

4 ) इसमें सांस का चलना बंद    4 ) इसमें सांस चलती        हो जाता हैं ।                          है ।

5 ) इसमें सीने में दर्द नहीं होता।  5 ) इसमें सीने में दर्द                                                      होता है ।

6 ) इसमें पसीना नहीं आता है।   6 ) इसमें पसीना                                                             आता हैं ।

7 ) यह इलेक्ट्रिकल समस्या है ।    7) यह ब्लॉकेज की                                                       समस्या है ।


NOTE  

यदि आपको इसके बारे ( कार्डियक अरेस्ट) में और जानकारी चाहिए या परिणामों को समझने में मदद चाहिए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

यह जानकारी केवल आपकी ज्ञान को बढ़ाने और अपने शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए है ।किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें l 


आपका 
अनिल कुमार  गुप्ता 


https://bodyhealthaapka.blogspot.com/2025/05/blog-post_25.html


शनिवार, 28 जून 2025

अंतर शुगर और डायबिटीज





 शुगर और डायबिटीज में क्या अन्तर है ? 

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शुगर ---- 

यहां शुगर या blood sugar का मतलब हमारे शरीर में मौजूद blood में शुगर की मात्रा से हैं जो breakdown होकर हमे एनर्जी देता है जिस से हम काफी ऊर्जावान महसूस करते है और सभी कामों को पूरे जोश और उत्साह से करते है । तथा दिनभर चुस्त दुरुस्त रहते है सुस्ती या आलस नहीं आता हैं  ।इस प्रकार ऐसे शुगर का blood में होना आवश्यक होता हैं ।

Blood में शुगर का यह लेवल हमारे काम करने के हिसाब से घटता बढ़ता रहता हैं। 

सामान्य स्तर पर एक स्वस्थ व्यक्ति का blood में शुगर खाली पेट 70 mg से 110 mg के बीच होना चाहिए ।

जबकि खाना खाने के 2 घंटे के  बाद यह स्तर  140 mg से कम होना चाहिए ।

( इसके डिटेल्स जानकारी के लिए हमारा ब्लॉग पोस्ट normal range ऑफ blood sugar देखे ) 

डायबिटीज 

जब शरीर में शुगर लेवल नियंत्रित नहीं हो पाता और वह असमान्य रूप से बढ़ता जाता है क्योंकि शरीर में मौजूद पैंक्रियाज इंसुलिन नहीं बना पाता ( इंसुलिन और पैंक्रियाज के विस्तृत जानकारी के लिए हमारा ब्लॉग पोस्ट  मानव शरीर में पैंक्रियाज और इंसुलिन के लिए इंसुलिन पोस्ट अवश्य पढ़ें ) जिस कारण blood में शुगर ब्रेकडाउन नहीं हो पाता और शुगर लेवल बढ़ते जाता हैं जो एक बीमारी का रूप ले लेता है जिसे डायबिटीज कहते है । इसे मधुमेह भी कहते है ।

मुख्य अंतर 

शुगर                                     डायबिटीज 

1) खून में ग्लूकोज की मात्रा    1) एक बीमारी जिसमे                                                   blood शुगर कंट्रोल                                                  नहीं होता ।       

2) सभी में होती हैं  ।              2 ) बीमारी है हमेशा                                                      नहीं  होती ।

3) लेवल घटता बढ़ता रहता है।  3 )  लेवल हमेशा                                                          बढ़ता रहता है । 

4) कारण --- गलत खानपान    4 ) इंसुलिन की कमी

   और कम एक्टिविटी                 या पैंक्रियाज की                                                          गड़बड़ी

निष्कर्ष ---- 

हर किसी का blood sugar लेवल बढ़ सकता है  , लेकिन जब शरीर इसे कंट्रोल नहीं कर पाता और यह लगातार बढ़ते जाता हैं तब यह डायबिटीज कहलाता है 


NOTE  

यदि आपको इसके बारे में और जानकारी चाहिए या परिणामों को समझने में मदद चाहिए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

यह जानकारी केवल आपकी ज्ञान को बढ़ाने और अपने शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए है ।किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें l 


आपका 
अनिल कुमार  गुप्ता 


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गुरुवार, 26 जून 2025

क्या सब्जी खाए शुगर रोगी ......

 सब्जी क्या खाए शुगर रोगी 

 ।

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सब्जी   ---- 

आजकल भारत  में शुगर पेशेंट की  संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । ऐसा लगता है कि शुगर एक महामारी का रूप लेते जा रहा है । हर 10 में 7 से 8 व्यक्ति शुगर की बीमारी से  परेशान है  इसे नियंत्रित  करने  के लिए लोग अस्पताल और डॉक्टर का चक्कर लगाते फिर रहे है । दिन प्रतिदिन अनेकों सख्या में कई तरह के महंगी से महंगी दवाइयां खा रहे है फिर भी शुगर है  कि नियंत्रित नहीं हो पा रहा है । 

आइए देखते है कि हम अपने शरीर को शुगर होने के बाद भी कुछ प्राकृतिक सब्जियों का सेवन कर काफी हद तक नियंत्रित कर सकते है ।

कुछ सब्जियों जिन्हें शुगर रोगी बिना किसी परेशानी के खा सकते है जो हमारे शुगर लेवल को नियंत्रित तो करेगा ही  हमें दिन प्रतिदिन ऊर्जावान भी बनाएगा जिस से हमें काफी फायदे के साथ ही अपने आप में ऊर्जा का अनुभूति भी होगा ।

हरी सब्जियों का ग्लाइसेमिक index ( इसके बारे में जान ने के लिए हमारे ब्लॉग ग्लाइसेमिक index और ग्लाइसेमिक LOAD को देखे ) काफी कम होता है जिस कारण इन्हें हम भरपूर मात्रा में सेवन कर सकते है ।

सब्जियां --- 

1 ) भिंडी --- 



इसमें फाइबर ज्यादा मात्रा में और कर्बोहाइड्रेट बहुत कम होता है  जिस कारण यह सब्जी एक तरफ जहां शुगर को कंट्रोल करता है वहीं दूसरी तरफ पेट को साफ कर कब्ज को दूर करने का काम करता है ।

इसे कम तेल में हल्का फ्राई कर या ग्रेवी वाला बना के खा सकते है ।

2 ) पालक --- 



पालक जिसमें भरपूर मात्रा में आयरन फाइबर मिनरल्स और विटामिन होते है । इसका ग्लाइसेमिक index भी कम होता है । एक तरफ जहां यह शुगर को बढ़ने नहीं देता वही ज्यादा मात्रा में फाइबर आयरन और विटामिन होने के कारण शरीर में ऊर्जा का लेवल को बनाए रखता है।

इसे सलाद सब्जी या सूप के रूप में ले सकते है ।


3 ) मशरूम ---  



शुगर रोगी के लिए यह एक बहुत ही अच्छा सब्जी है ।जिसमें भरपूर मात्रा में फाइबर एंटीऑक्सीडेंट विटामिन D  और कम कैलोरी होता है ।

इसमें विटामिन डी कम कैलोरी होने के कारण यह शरीर में शुगर को नियंत्रित करता हैं साथ ही हड्डियों के लिए वरदान साबित होता है।

मशरूम को बटर और थोड़ी शुगर के साथ भूनने से उनका स्वाद गहरा और मीठा-नमकीन हो सकता है।

4 )ब्रोकली -- 



ये शुगर रोगी के लिए बहुत ही अच्छी सब्ज़ी है जिसमें सेल्फोराफेन होता है जो इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है । और शुगर को नियंत्रित करता हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होता हैं ।

इसे हल्के भाप में पकाकर खाना चाहिए।

5 ) पत्तागोभी --- 



इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होता है जो शुगर लेवल को कम करने और पाचन को मजबूत बनाने में मदद करता है।

इसे सब्जी सलाद या कच्चे रूप में भी ले सकते हैं ।

बारिश के मौसम में लेते समय अच्छे से साफ कर प्रयोग करना चाहिए ।

6 ) लौकी --- 




लौकी एक बेहतरीन सब्जी है जिसे शुगर पेशेंट भरपूर मात्रा में कई रूपों में प्रयोग कर सकता हैं ।

इसमें फाइबर और पानी पर्याप्त मात्रा में होता है जिस कारण यह शरीर में शुगर को नियंत्रित करता हैं और पानी की मात्रा को बराबर बनाए रखता हैं ।

इसका प्रयोग सब्जी के रूप में या सुबह में जूस के रूप में ले सकते है ।

कड़वी लौकी का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।

7 ) फूलगोभी -- 



. ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है – यह ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ाती।

2. फाइबर से भरपूर – पाचन बेहतर होता है और लंबे समय तक पेट भरा रहता है।

3. कैलोरी कम – वजन नियंत्रण में मदद करती है।

4. एंटीऑक्सीडेंट्स – शरीर की सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करती है, जो डायबिटीज़ में आम समस्या है।

5. विटामिन C, K, और B-complex – रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

बहुत ज्यादा तलकर न खाएं (तेल से ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर असर पड़ता है)

आलू के साथ न मिलाएं — आलू शुगर बढ़ा सकता है

8 )  करेला ---- 



करेला अपने कड़वे स्वाद के लिए जाना जाता है किन्तु यह शुगर रोगी के लिए बहुत ही अच्छा होता है ।

इसमें मौजूद तत्व इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता हैं जो blood sugar को कम करने में मदद करता है । 

इसे सुबह में खाली पेट 1 छोटा करेला का जूस भी लिया जा सकता है।

9 ) खीरा  ----



    खीरा कम कैलोरी वाला सब्जी है ।  जिसमे 95 % पानी होता है । जो शुगर को कण्ट्रोल करने में मदद करता है । साथ ही इसमे भरपूर मात्रा में फाइबर होता है । जो पाचन में सहायक होता है । इसका प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करना बहुत ही लाभकारी होता है ।

10 ) टमाटर ---- 



टमाटर का जमकर सेवन करने से शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है. टमाटर में लाइकोपीन, विटामिन C, और कई लाभकारी एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. ये तत्व सूजन को कम करने और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. 

11) शिमला मिर्च 



इसमें  एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन C और फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है. ये तत्व ब्लड शुगर को स्टेबल रखने में मदद करते है ।



 अतिरिक्त सुझाव:

अ) सब्जियों को फ्राई करने की बजाय उबालकर या स्टीम करके खाएँ।

ब) ज्यादा तेल, घी और मसालों से बचें।

स) हर मील में आधी प्लेट सब्जियाँ शामिल करने की कोशिश करें।

खाना पकाने के टिप्स: 

तेल और मसालों का उपयोग कम करें।सब्जियों को ज्यादा न पकाएँ, ताकि पोषक तत्व बरकरार रहें। नमक और चीनी से बचें; नींबू या हल्के मसाले जैसे जीरा , हल्दी का उपयोग करें। भोजन के साथ कार्बोहाइड्रेट (रोटी, चावल) की मात्रा सीमित करें। 

सावधानी: 

अपने डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह लें, क्योंकि हर व्यक्ति की डाइट अलग हो सकती है।

NOTE  

यदि आपको इसके बारे में और जानकारी चाहिए या परिणामों को समझने में मदद चाहिए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

यह जानकारी केवल आपकी ज्ञान को बढ़ाने और अपने शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए है ।किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें l 


आपका 
अनिल कुमार  गुप्ता 


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सोमवार, 23 जून 2025

GHAW इन SUGAR में घाव का इलाज

                             s h a r e  &  l i k e

 शुगर की बीमारी में घाव 

शुगर की बीमारी में घाव एक गंभीर समस्या बन सकती है खासकर जब ये समस्या पैर में या उंगलियों के बीच में हो अतः समय रहते इसका उपचार सावधानी और सुरक्षा जरूरी है । 

आइए इस पर विस्तृत रूप से चर्चा करते है।

🩸🦶 शुगर की बीमारी में घाव: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें! 🦶🩸

🔴 डायबिटीज़ में घाव क्यों खतरनाक हैं?

✅ घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है

✅ पैरों में दर्द या चोट का अहसास नहीं होता

✅ संक्रमण (इन्फेक्शन) का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है

✅ इलाज में देर से अंग काटने तक की नौबत आ सकती है ।

🔴 डायबिटीज़ में घाव क्यों खतरनाक होता है?


1. धीमी भरने की क्षमता:

ब्लड शुगर लेवल ज़्यादा होने से शरीर की घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

2. स्नायु क्षति (न्यूरोपैथी):

डायबिटीज़ में नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे दर्द महसूस नहीं होता और घाव का पता देर से चलता है।

3. खून का संचार कम होना:

डायबिटीज़ में रक्त संचार प्रभावित होता है, जिससे घाव तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते।

4. संक्रमण (इन्फेक्शन) का खतरा:

हाई शुगर इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है, जिससे बैक्टीरिया से संक्रमण तेज़ी से फैल सकता है।

⚠️ शुगर में होने वाले आम घाव:


1)  डायबिटिक फुट अल्सर (Diabetic Foot Ulcer):

2 )   पैर के तलवे या अंगुलियों में छाले या कट लगने के बाद भरने में समय लगना।


3 )   फफोले, छाले या कट:

जो जल्दी सूखते नहीं और सड़ने लगते हैं।


4)    नाखून के पास संक्रमण 

5)     या पैरों की त्वचा फटना।


🩺 लक्षण जो नज़रअंदाज़ न करें:

⚠️ फफोले या कट जो जल्दी नहीं भरते

⚠️ घाव से पस या बदबू आना

⚠️ त्वचा का काला पड़ना या सुन्न होना

⚠️ तेज़ जलन या सूजन

घाव कहां-कहां हो सकते हैं?

  • पैरों के तलवों में

  • एड़ियों के पास

  • अंगुलियों के बीच

  • नाखून के पास

  • किसी चोट लगने वाली जगह पर

इन घावों को डायबेटिक फुट अल्सर (Diabetic Foot Ulcer) कहा जाता है।


जोखिम कारक (Risk Factors)

  • लंबे समय से मधुमेह

  • ब्लड शुगर कंट्रोल न होना

  • धूम्रपान और शराब का सेवन

  • पुराने घाव का ठीक न होना

  • अनुचित जूते पहनना

  • नंगे पांव चलना

    उपचार (Treatment)

    1. ब्लड शुगर को नियंत्रित करना

    • इंसुलिन या दवाइयों के माध्यम से

    • संतुलित आहार और व्यायाम

    2. घाव की सफाई और ड्रेसिंग

    • घाव को रोज़ साफ़ करना

    • बैक्टीरिया को हटाने वाली दवाइयाँ लगाना

    • स्टरलाइज्ड पट्टी का प्रयोग

    3. एंटीबायोटिक्स का प्रयोग

    • संक्रमण होने पर मौखिक या इंजेक्शन द्वारा एंटीबायोटिक्स देना

    4. डिब्राइडमेंट (Debridement)

    • मृत ऊतकों को हटाना ताकि घाव भर सके

    5. ऑर्थोपेडिक सपोर्ट

    • विशेष जूते या सैंडल

    • पैरों को दबाव से बचाना

    6. सर्जरी

    • गहरे घावों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है

    • अत्यधिक संक्रमित मामलों में अंग हटाना (amputation)


    रोकथाम (Prevention)

    1. ब्लड शुगर को हमेशा नियंत्रित रखें।

    2. पैरों की रोज़ाना जांच करें।

    3. साफ़ और सूखे मोज़े पहनें।

    4. कम्फर्टेबल और फिटिंग जूते पहनें।

    5. नंगे पांव ना चलें।

    6. छोटे कट या छालों को नजरअंदाज ना करें।

    7. धूम्रपान से बचें – यह रक्त प्रवाह को और कम करता है।

    8. हर 6 महीने में पैरों की जांच करवाएं।

निष्कर्ष

मधुमेह में घाव एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जो सही जानकारी, नियमित जांच और सतर्कता से रोकी जा सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि मधुमेह के मरीज अपने ब्लड शुगर पर नियंत्रण रखें, पैरों की नियमित देखभाल करें, और किसी भी घाव या संक्रमण को छोटा समझकर नजरअंदाज न करें।

समय पर इलाज लेने से न केवल घाव ठीक हो सकते हैं, बल्कि मरीज एक सामान्य जीवन जी सकता है।


  • NOTE  

    यदि आपको इसके बारे में और जानकारी चाहिए या परिणामों को समझने में मदद चाहिए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

    यह जानकारी केवल आपकी ज्ञान को बढ़ाने और अपने शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए है ।किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें l 


    आपका 
    अनिल कुमार  गुप्ता 


    https://bodyhealthaapka.blogspot.com/2025/05/blog-post_25.html


मंगलवार, 17 जून 2025

DIABETIC FOOT

 DIABETIC FOOT 


      S H A R E  & L I K E  

यह एक ऐसा बीमारी है जो डायबिटीज के कारण होता है 

इसमें  पैरों में blood circulation सही ढंग से नहीं हो पाता है जिस कारण पैरों में घाव का होना , झुनझुनी होना , सुन्न पड़ जाना  जैसे लक्षण दिखाई देते है ।

 SYMPOTMOS 

1 )  पैरों में हुए घाव का जल्दी न सूखना 

2 )  पैरों में चलते समय तेज दर्द होना 

3 ) पैरों का सुन्न होना 

4 )  पैरों का रंग बदलना या काला पड़ना 

5 )  पैरों या टखनों में सुजन होना  


TREATMENT 

मधुमेह पैर अल्सर का उपचार 

मधुमेह पैर अल्सर की रोकथाम

  • 1)। न्यूरोपैथिक और संवहनी जटिलताओं को कम करने के लिए मधुमेह नियंत्रण को अनुकूलित करें
  • 2 )  धूम्रपान बंद करना
  • 3 )  जोखिमग्रस्त पैर की नियमित जांच, तथा नाखून की सावधानीपूर्वक कटाई
  •  4 )  टिनिया पेडिस या फटी एड़ियों जैसी गैर-अल्सरेटिव स्थितियों का शीघ्र उपचार
  • 5 )  उपयुक्त जूते - उचित फिटिंग वाले मुलायम जूते या माप के अनुसार बने इनसोल
  • 6 )  व्यायाम और फिजियोथेरेपी
  • 7 )  रोगी, परिवार और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की शिक्षा

  • MEET YOUR DOCTOR --
1 )  जब घाव या अल्सर ठीक न हो रहा हो ।

2 )  जब पैर का रंग बदल रहा हो  ।

3 )  लगातार दर्द सुजन और बुखार रहता हो।

4 )  पैर में सुन्नपन बना रहता हो ।


नए उपचार:

उन्नत सर्जरी: 

डायबिटिक फुट अल्सर के लिए उन्नत उपचार जैसे डीब्रिडमेंट (संक्रमित ऊतकों को हटाना) और पुनर्निर्माण सर्जरी प्रभावी पाए गए हैं।

हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी: 


कुछ अध्ययनों में यह पाया गया कि हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी घावों को ठीक करने में मदद कर सकती है, खासकर जब रक्त संचार कम हो।

जैविक ड्रेसिंग और थेरेपी: 


बायोएक्टिव ड्रेसिंग और ग्रोथ फैक्टर थेरेपी का उपयोग घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जा रहा है।

बचाव के उपाय (Prevention):

1. रोजाना पैरों की सफाई और निरीक्षण करें।


2. पैरों को नम न रहने दें।


3. नंगे पांव न चलें।


4. आरामदायक और साफ जूते पहनें।


5. नियमित रूप से डॉक्टर से जांच कराएं।


6. ब्लड शुगर नियंत्रित रखें।


7 )। डायबिटिक फूट एक रोकी जा सकने वाली समस्या है ।

8 )।  समय पर देखभाल और सही जानकारी से इससे बचा जा सकता है ।


"पैर ज़िंदगी की चाल हैं – इनका ख्याल रखें"

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NOTE  

यदि आपको इसके बारे में और जानकारी चाहिए या परिणामों को समझने में मदद चाहिए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

यह जानकारी केवल आपकी ज्ञान को बढ़ाने और अपने शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए है ।किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें l 


आपका 
अनिल कुमार  गुप्ता 


https://bodyhealthaapka.blogspot.com/2025/05/blog-post_25.html



रविवार, 15 जून 2025

BRITTLE DIABETES क्या होता है

 BRITTLE  DIABETES 


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1)    यह डायबिटीज SUGAR LEVEL में उतार चढाव को दर्शाता है इसमे HYPOGLYCEMIA और HYPERGLYCEMIA बार बार आते है जिसमे अस्पताल जाने की संभावना बढ़ जाती है 

2)  इसे UNSTABLE DIABETES या LABILE DIABETES भी कहते है ।

3)  यह एक दुर्लभ प्रकार का diabetes है जो TYPE 1 DIABETES के रोगियों में देखने को मिल सकता है ।

4)  कभी कभी यह टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों में भी देखने को मिलता है ।

5)  इस रोग में PANCREAS इंसुलिन बनाना बंद कर देता है ।

SYMPTOMS ( लक्षण ) 

इसमें शुगर रोगी के जैसा ही लक्षण होते है परंतु इसमें तीव्रता अधिक होती है ।

इसमें हाइपो और हाइपर दोनों के लक्षण देखने को मिलते हैं ।

SYMPTOMS OF HYPOGLYCEMIA 


1 ) आँखों से धुंधला दिखना 

2 )  सर में दर्द बना रहना 

3)  हमेशा थकान बने रहना 

4 )  पसीना आना 

5 )  बहुत ज्यादा भूख लगना 

6 ) चक्कर आना 

SYMPTOMS OF HYPERGLYCEMIA 

1 ) बार बार प्यास लगना 
2 ) बार बार पेशाब आना 
3 ) आँखों से कम दिखाई देना 
4 ) कही कट या घाव होने पर भरने या सूखने में ज्यादा समय लगना 
5 ) हमेशा सर में दर्द बने रहना 
6 )हमेशा थका हुआ महसूस करना 
7 ) ज्यादा भूख लगना 
8 ) पेट में दर्द होना 
9 ) पसीना आना 
10 ) उल्टी होना 
11 ) पैरो में ठंढा लगना 
12 )बालों का झड़ना 

🔹 कारण (Causes):

1)  इंसुलिन डोज का ठीक से काम न करना

2)  हार्मोनल असंतुलन

3)  तनाव या मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ

4)  खानपान या जीवनशैली में अनियमितता

5)  गैस्ट्रोपैरेसिस (पेट की मांसपेशियाँ ठीक से काम नहीं करतीं)





🔹 उपचार (Treatment):

1.  इंसुलिन पंप (Insulin pump) का उपयोग

2.  Continuous Glucose Monitoring (CGM)

3.  संतुलित और नियमित भोजन

4.  मानसिक स्वास्थ्य का इलाज (जैसे काउंसलिंग या थेरेपी)

5.  डॉक्टर की निगरानी में इंसुलिन का एडजस्टमेंट

जटिलताएं  -----


A)  बार-बार हाइपोग्लाइसीमिया या हाइपरग्लाइसीमिया से गुर्दे, आंखें, और हृदय संबंधी समस्याएं।

B)  मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, जैसे चिंता या डायबिटीज डिस्ट्रेस।

C)  जीवन की गुणवत्ता में कमी।

नवीनतम उपचार  (MODERN TREATMENT )

 ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM)

CGM डिवाइस, जैसे Dexcom G7 और Freestyle Libre 3, ब्रिटल डायबिटीज के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये डिवाइस रियल-टाइम में ब्लड शुगर की निगरानी करते हैं और अलार्म के माध्यम से हाइपो- या हाइपरग्लाइसीमिया की चेतावनी देते हैं। 2024 तक, इन डिवाइसों की सटीकता और उपयोगिता में काफी सुधार हुआ है।

इंसुलिन पंप और बंद-लूप सिस्टम:

ये सिस्टम CGM के साथ मिलकर स्वचालित रूप से इंसुलिन डोज को समायोजित करते हैं, जिससे ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव कम होता है।

नई दवाएं:

A)  टेप्लिज़ुमैब: 

यह दवा टाइप 1 डायबिटीज की प्रगति को धीमा करने में मदद कर सकती है, विशेष रूप से प्री-डायबिटिक चरण में। 

B)  GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट:  
 
ग्लूकागन-जैसा पेप्टाइड 1 (GLP-1) आधारित दवाएं, जैसे लिराग्लुटाइड, कुछ मरीजों में ब्लड शुगर नियंत्रण में सुधार कर सकती हैं। 

C)  जीवनशैली और मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप: 
(LIFE STYLE & CYCOLOGY INTERFERE )

संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और तनाव प्रबंधन ब्रिटल डायबिटीज के प्रबंधन में महत्वपूर्ण हैं। डायबिटीज शिक्षकों और पोषण विशेषज्ञों की मदद से व्यक्तिगत आहार योजनाएं बनाई जा सकती हैं।मनोवैज्ञानिक सहायता, जैसे काउंसलिंग और डायबिटीज डिस्ट्रेस प्रबंधन, मरीजों को भावनात्मक रूप से मजबूत करने में मदद करती है।

D)  इनहेल्ड इंसुलिन: ( INHALED INSULIN )

इनहेल्ड इंसुलिन (जैसे Afrezza) कुछ मरीजों के लिए इंजेक्शन का एक सुविधाजनक विकल्प है। यह तेजी से काम करता है और ब्रिटल डायबिटीज में त्वरित ब्लड शुगर नियंत्रण के लिए उपयोगी हो सकता है।

E)  डायबिटीज पैच: ( DIABETES PATCH )

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया, ICMR का डायबिटीज पैच ब्लड शुगर की निगरानी और दवा वितरण को एकीकृत करता है। यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी है जो बार-बार इंजेक्शन लेने में कठिनाई महसूस करते हैं।

🔹 ध्यान देने योग्य बातें:    
( ALERTNESS ) 

यह स्थिति जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है।

नियमित निगरानी, इलाज और सही दिनचर्या से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। 

NOTE  

यदि आपको इसके बारे में और जानकारी चाहिए या परिणामों को समझने में मदद चाहिए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

यह जानकारी केवल आपकी ज्ञान को बढ़ाने और अपने शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए है ।किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें l 


आपका 
अनिल कुमार  गुप्ता 


https://bodyhealthaapka.blogspot.com/2025/05/blog-post_25.html






दिल हृदय HEART

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